बीमा की दुनिया में छोटी-छोटी शर्तें (Hidden Terms) बड़े बदलाव ला सकती हैं। एक स्मार्ट खरीदार बनने के लिए इन 10 पैमानों पर अपनी पॉलिसी को परखें:

1. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio – CSR)

यह दर्शाता है कि कंपनी ने पिछले साल प्राप्त हुए कुल क्लेम में से कितने प्रतिशत का भुगतान किया। हमेशा ऐसी कंपनी चुनें जिसका CSR 95% से अधिक हो। यह कंपनी की विश्वसनीयता का प्रमाण है।

2. नेटवर्क अस्पतालों की सूची (Network Hospitals)

चेक करें कि आपके घर के पास के बड़े अस्पताल और आपके पसंदीदा डॉक्टर उस बीमा कंपनी के पैनल में हैं या नहीं। कैशलेस इलाज की सुविधा तभी मिलती है जब अस्पताल कंपनी के नेटवर्क में हो।

3. रूम रेंट लिमिट (Room Rent Limit)

कई पॉलिसियों में कमरे के किराए पर सीमा होती है (जैसे सम इंश्योर्ड का 1%)।

सावधान: यदि आपकी लिमिट ₹5,000 है और आप ₹8,000 वाले कमरे में रुकते हैं, तो कंपनी न केवल रूम रेंट कम देगी, बल्कि आपके डॉक्टर की फीस और सर्जरी के खर्च में भी आनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) करेगी। हमेशा ‘No Room Rent Cap’ वाली पॉलिसी लें।

4. को-पेमेंट क्लॉज (Co-payment Clause)

को-पेमेंट का मतलब है कि बिल का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 10% या 20%) आपको अपनी जेब से देना होगा। कोशिश करें कि बिना को-पेमेंट वाली पॉलिसी लें, ताकि इमरजेंसी में आपको एक रुपया भी न देना पड़े।

5. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन (Pre & Post Hospitalization)

बीमारी केवल अस्पताल में रहने तक सीमित नहीं होती। अच्छे प्लान अस्पताल में भर्ती होने से 60 दिन पहले के टेस्ट और डिस्चार्ज के 90 से 180 दिन बाद तक की दवाइयों का खर्च कवर करते हैं।

6. रिस्टोरेशन बेनिफिट (Restoration Benefit)

अगर एक ही साल में आप अपना पूरा बीमा कवर (जैसे ₹5 लाख) इस्तेमाल कर लेते हैं और दोबारा बीमार पड़ जाते हैं, तो कंपनी आपके कवर को मुफ्त में फिर से ₹5 लाख कर देती है। इसे ‘रिफिल’ बेनिफिट भी कहते हैं।

7. वेटिंग पीरियड (Waiting Period)

चेक करें कि पहले से मौजूद बीमारियों (PED) के लिए आपको कितने साल इंतज़ार करना होगा। 2 साल का वेटिंग पीरियड 4 साल के मुकाबले कहीं बेहतर है।

8. डे-केयर प्रक्रियाओं का कवरेज (Day-care Procedures)

आजकल तकनीक की वजह से कई ऑपरेशन (जैसे मोतियाबिंद या पथरी) 24 घंटे से कम समय में हो जाते हैं। सुनिश्चित करें कि आपकी पॉलिसी इन ‘डे-केयर’ इलाज को कवर करती है।

9. नो-क्लेम बोनस (No-Claim Bonus)

देखें कि क्लेम न लेने पर कंपनी आपके कवर को कितने प्रतिशत बढ़ाती है। कुछ कंपनियां 5-10 साल में आपके कवर को बिना प्रीमियम बढ़ाए 200% (दोगुना) तक कर देती हैं।

10. एक्सक्लूजन (Exclusions – क्या शामिल नहीं है)

पॉलिसी में क्या मिलेगा, उससे ज्यादा जरूरी यह जानना है कि क्या नहीं मिलेगा। कॉस्मेटिक सर्जरी, खुद को पहुंचाई गई चोट या बिना डॉक्टर की सलाह के ली गई दवाइयां आमतौर पर कवर नहीं होतीं।

हेल्थ इंश्योरेंस केवल टैक्स बचाने का जरिया नहीं है, यह मुश्किल वक्त का साथी है। ऊपर दी गई चेकलिस्ट को ध्यान में रखकर आप एक ऐसी पॉलिसी चुन सकते हैं जो ज़रूरत पड़ने पर वास्तव में आपके काम आए।

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