हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी आपको यह आजादी देती है कि आप अपनी पसंद की कंपनी और बेहतर फीचर्स चुन सकें। IRDAI के नियमों के अनुसार, नई कंपनी को आपकी पुरानी पॉलिसी के ‘क्रेडिट’ (जैसे बीता हुआ वेटिंग पीरियड) को स्वीकार करना अनिवार्य है।
Explore More Insurance Topics
स्टेप 1: सही समय पर आवेदन (The 45-Day Rule)
पोर्ट करने का मन बना लें तो अपनी मौजूदा पॉलिसी खत्म होने से कम से कम 45 से 60 दिन पहले नई कंपनी से संपर्क करें। आखिरी समय (जैसे 10-15 दिन पहले) में आवेदन करने पर कंपनी इसे रिजेक्ट कर सकती है।
स्टेप 2: नई कंपनी को जानकारी दें
नई कंपनी को बताएं कि आप ‘पोर्ट’ करना चाहते हैं। वे आपसे ‘पोर्टेबिलिटी फॉर्म’ और ‘प्रपोजल फॉर्म’ भरने को कहेंगे।
स्टेप 3: जरूरी दस्तावेज जमा करें
आपको निम्नलिखित कागज देने होंगे:
- पुरानी पॉलिसी के पिछले साल के दस्तावेज (Policy Schedule)।
- रिन्यूअल नोटिस (यदि मिला हो)।
- कोई पिछला क्लेम लिया है, तो उसकी जानकारी।
- केवाईसी दस्तावेज (KYC)।
स्टेप 4: अंडरराइटिंग और मेडिकल चेकअप
नई कंपनी आपकी उम्र और हेल्थ हिस्ट्री देखेगी। 45 वर्ष से अधिक उम्र होने पर वे आपका मेडिकल टेस्ट करा सकते हैं। आपकी सेहत के आधार पर वे आपकी पोर्टेबिलिटी स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।
स्टेप 5: पॉलिसी जारी होना
एक बार नई कंपनी संतुष्ट हो जाए, तो वे आपको प्रीमियम की राशि बताएंगे। भुगतान करते ही आपकी पुरानी पॉलिसी का सारा फायदा नई पॉलिसी में शिफ्ट हो जाएगा।
पोर्ट करते समय ध्यान रखने योग्य 3 बातें
- निरंतरता (Continuity): पोर्टेबिलिटी केवल तभी संभव है जब आपकी पुरानी पॉलिसी बिना किसी ‘ब्रेक’ के चालू हो।
- प्रीमियम में बदलाव: नई कंपनी अपने नियमों के हिसाब से प्रीमियम तय करती है, जो पुरानी कंपनी से अलग हो सकता है।
- रिजेक्शन का अधिकार: नई कंपनी के पास पोर्टेबिलिटी आवेदन को रिजेक्ट करने का अधिकार होता है (खासकर यदि मरीज को पहले से कोई गंभीर बीमारी हो या उम्र बहुत ज्यादा हो)।
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी ग्राहकों को “राजा” बनाती है। अगर आपकी मौजूदा कंपनी क्लेम के समय परेशान करती है या रिन्यूअल पर अचानक प्रीमियम बढ़ा देती है, तो आज ही बेहतर विकल्प की तलाश शुरू करें।
