मान लीजिए आपके पास ₹5 लाख की पॉलिसी है, लेकिन आप चाहते हैं कि किसी बड़ी बीमारी के लिए आपके पास ₹20 लाख का कवर हो। अगर आप ₹20 लाख की नई पॉलिसी लेंगे, तो प्रीमियम बहुत ज्यादा होगा। यहीं काम आता है ‘सुपर टॉप-अप’ प्लान।
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- उदाहरण के लिए: आपने ₹5 लाख के डिडक्टिबल के साथ ₹15 लाख का सुपर टॉप-अप लिया।
- केस 1: आपका बिल ₹4 लाख आया। यहाँ सुपर टॉप-अप कुछ नहीं देगा (यह आपकी बेस पॉलिसी से भरा जाएगा)।
- केस 2: आपका बिल ₹8 लाख आया। यहाँ पहले ₹5 लाख आपकी बेस पॉलिसी या जेब से जाएंगे, और ऊपर के ₹3 लाख सुपर टॉप-अप कंपनी देगी।
‘टॉप-अप’ और ‘सुपर टॉप-अप’ में अंतर (सबसे जरूरी बात)
लोग अक्सर इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन सुपर टॉप-अप कहीं ज्यादा बेहतर है:
- टॉप-अप (Top-up): यह केवल ‘एक बार’ के क्लेम पर काम करता है। अगर साल में दो बार अस्पताल जाना पड़ा और दोनों बिल डिडक्टिबल से कम रहे, तो यह काम नहीं करेगा।
- सुपर टॉप-अप (Super Top-up): यह साल भर के कुल (Total) बिलों को जोड़ता है। अगर साल में तीन बार अस्पताल जाने पर कुल खर्च डिडक्टिबल सीमा को पार कर जाए, तो यह भुगतान शुरू कर देता है।
सुपर टॉप-अप लेने के 3 बड़े फायदे
1. प्रीमियम में भारी बचत
चूंकि कंपनी को पता है कि वह तभी पैसा देगी जब बिल एक सीमा (जैसे ₹5 लाख) से ऊपर जाएगा, इसलिए वह इसका प्रीमियम बहुत कम रखती है। ₹20 लाख का सुपर टॉप-अप कवर अक्सर ₹2,000 – ₹3,000 सालाना में मिल जाता है।
2. कॉर्पोरेट पॉलिसी के लिए बेस्ट
अगर आपके ऑफिस (Office) से आपको ₹3 लाख का बीमा मिला है, तो आप खुद एक ₹3 लाख के डिडक्टिबल वाला सुपर टॉप-अप ले सकते हैं। इससे ऑफिस के कवर के ऊपर आपको एक बड़ी सुरक्षा मिल जाएगी।
3. नो-क्लेम बोनस का लाभ
आप अपनी बेस पॉलिसी का नो-क्लेम बोनस बचा सकते हैं और बड़े खर्चों के लिए सुपर टॉप-अप पर निर्भर रह सकते हैं।
किसे लेना चाहिए?
- जिनके पास कम राशि (₹2-5 लाख) की बेस पॉलिसी है।
- जो वरिष्ठ नागरिक हैं और जिन्हें बड़ी सर्जरी का खतरा अधिक है।
- जो कम बजट में ₹50 लाख या ₹1 करोड़ का कवर चाहते हैं।
सुपर टॉप-अप प्लान “बैकअप के लिए बैकअप” की तरह है। यह आपको मानसिक शांति देता है कि अगर कोई बड़ी मेडिकल इमरजेंसी आई, तो आपको अपनी संपत्ति बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
