बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के पीछे कई कानूनी और तकनीकी कारण होते हैं। यदि आप इन 5 आम गलतियों से बचते हैं, तो आपका क्लेम सेटल होने की संभावना 99% बढ़ जाती है।

1. पहले से मौजूद बीमारियों को छुपाना (Non-Disclosure of PED)

यह क्लेम रिजेक्शन का सबसे बड़ा और आम कारण है। पॉलिसी खरीदते समय लोग अक्सर प्रीमियम कम रखने या पॉलिसी रिजेक्ट होने के डर से अपनी मौजूदा बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज, बीपी या पुरानी सर्जरी) छुपा लेते हैं।

  • नतीजा: इलाज के दौरान जब डॉक्टर की रिपोर्ट में पता चलता है कि बीमारी पुरानी है, तो कंपनी ‘धोखाधड़ी’ मानकर क्लेम रिजेक्ट कर देती है और आपकी पॉलिसी भी रद्द हो सकती है।

2. वेटिंग पीरियड और एक्सक्लूजन की जानकारी न होना

जैसा कि हम पहले चर्चा कर चुके हैं, हर पॉलिसी में कुछ बीमारियों के लिए 2-4 साल का वेटिंग पीरियड होता है। इसके अलावा, कुछ चीजें जैसे कॉस्मेटिक सर्जरी, डेंटल ट्रीटमेंट या मोटापे का इलाज (Bariatric Surgery) अक्सर पॉलिसी में कवर नहीं होते।

  • नतीजा: यदि आप वेटिंग पीरियड खत्म होने से पहले या ‘एक्सक्लूडेड’ बीमारी के लिए क्लेम करते हैं, तो वह तुरंत खारिज कर दिया जाएगा।

3. सूचना देने में देरी (Delay in Intimation)

बीमा कंपनियों के सख्त नियम होते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने के कितने समय के भीतर उन्हें सूचित करना है। आमतौर पर इमरजेंसी में 24 घंटे और प्लान्ड सर्जरी में 48 घंटे पहले बताना अनिवार्य होता है।

  • नतीजा: यदि आप डिस्चार्ज होने के कई दिनों बाद कंपनी को बताते हैं, तो वे जांच में असमर्थता जताते हुए क्लेम रिजेक्ट कर सकते हैं।

4. अधूरी या गलत कागजी कार्रवाई (Incomplete Documentation)

रीइंबर्समेंट क्लेम के मामले में, ओरिजिनल बिल, डिस्चार्ज समरी, और डॉक्टर के पर्चे जमा करना बहुत जरूरी है। यदि आप ओरिजिनल बिल के बजाय फोटोकॉपी देते हैं या अस्पताल की स्टैम्प गायब है, तो क्लेम अटक सकता है।

  • नतीजा: कागजों में विसंगति होने पर कंपनी को संदेह होता है और वे क्लेम रोक देती हैं।

5. 24 घंटे अस्पताल में भर्ती न होना

ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों की बुनियादी शर्त यह है कि मरीज को कम से कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहना चाहिए। हालांकि आधुनिक ‘डे-केयर’ प्रक्रियाओं (जैसे मोतियाबिंद) के लिए इसमें छूट है, लेकिन सामान्य बुखार या छोटे इलाज के लिए यह नियम लागू होता है।

  • नतीजा: यदि आप केवल कुछ घंटों के लिए एडमिट होकर ग्लूकोज चढ़वाते हैं और घर आ जाते हैं, तो कंपनी इसे ‘OPD’ मानकर क्लेम खारिज कर देगी।

क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आपका क्लेम गलत तरीके से रिजेक्ट किया गया है, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:

  1. कंपनी के ग्रीवेंस सेल (Grievance Cell) को लिखित शिकायत भेजें।
  2. यदि समाधान न मिले, तो बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास अपनी शिकायत दर्ज कराएं। यह एक सरकारी संस्था है जो ग्राहकों की मदद करती है।

हेल्थ इंश्योरेंस “विश्वास” का अनुबंध है। पॉलिसी लेते समय ईमानदार रहें और क्लेम करते समय समय का ध्यान रखें। याद रखें, आधी-अधूरी जानकारी हमेशा नुकसानदेह होती है।

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