क्या आप जानते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले किए गए ब्लड टेस्ट, एमआरआई (MRI), और डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस का पैसा भी आपको वापस मिल सकता है? आइए समझते हैं कि इसकी प्रक्रिया क्या है और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. प्री-हॉस्पिटलाइजेशन क्या है? (भर्ती होने से पहले के खर्च)

किसी बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती होने से पहले जो भी जांच या दवाइयां ली जाती हैं, वे इसमें आती हैं।

  • समय सीमा: आमतौर पर अधिकांश बीमा कंपनियां भर्ती होने से 30 से 60 दिन पहले तक के खर्चों को कवर करती हैं।
  • शर्त: ये खर्च उसी बीमारी से संबंधित होने चाहिए जिसके लिए मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ है।

2. पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन क्या है? (डिस्चार्ज के बाद के खर्च)

अस्पताल से घर आने के बाद रिकवरी के लिए जो दवाइयां, फॉलो-अप टेस्ट या डॉक्टर की फीस लगती है, उसे पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन कहते हैं।

  • समय सीमा: कंपनियां आमतौर पर डिस्चार्ज के 60 से 180 दिन बाद तक के खर्चों को कवर करती हैं।

इन खर्चों को क्लेम करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

ध्यान रहे, अस्पताल के बिलों का भुगतान ‘कैशलेस’ हो सकता है, लेकिन भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों का पैसा हमेशा रीइंबर्समेंट (Reimbursement) के जरिए ही वापस मिलता है।

स्टेप 1: बिलों को संभालकर रखें

बीमारी के शुरुआती लक्षणों से लेकर ठीक होने तक के हर छोटे-बड़े बिल को संभालकर रखें। इसमें डॉक्टर का पर्चा (Prescription), डायग्नोस्टिक रिपोर्ट्स और दवाइयों के पक्के बिल शामिल होने चाहिए।

स्टेप 2: अस्पताल का क्लेम सेटल होने का इंतज़ार करें

आमतौर पर कंपनियां प्री और पोस्ट खर्चों का भुगतान तभी करती हैं जब मुख्य अस्पताल का बिल सेटल हो चुका हो।

स्टेप 3: क्लेम फॉर्म और दस्तावेज जमा करें

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद (अक्सर 7 से 30 दिनों के भीतर) अपनी कंपनी को निम्नलिखित दस्तावेज भेजें:

  • विधिवत भरा हुआ क्लेम फॉर्म।
  • अस्पताल की डिस्चार्ज समरी की कॉपी।
  • सभी ओरिजिनल फार्मेसी बिल और लैब रिपोर्ट्स।
  • डॉक्टर के वे पर्चे जिनमें उन दवाइयों या टेस्ट की सलाह दी गई हो।

महत्वपूर्ण टिप्स जो आपके काम आएंगे

  • डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य है: यदि आपके पास दवा का बिल है लेकिन डॉक्टर का वह पर्चा नहीं है जिस पर वह दवा लिखी गई है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
  • समय सीमा का पालन: अलग-अलग कंपनियों के नियम अलग हो सकते हैं। कुछ कंपनियां डिस्चार्ज के 30 दिन के भीतर प्री-हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम मांगती हैं। अपनी पॉलिसी के ‘फाइन प्रिंट’ को जरूर पढ़ें।
  • डिजिटल कॉपी रखें: ओरिजिनल कागज भेजने से पहले सभी बिलों की साफ फोटो खींचकर अपने फोन में सुरक्षित रख लें।

हेल्थ इंश्योरेंस का पूरा लाभ उठाने के लिए केवल अस्पताल के बड़े बिल पर नजर न रखें। अगर आप सही तरीके से दस्तावेज जमा करते हैं, तो बीमारी पर खर्च हुआ आपका एक-एक रुपया वापस मिल सकता है।

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