हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय हमारे सामने ‘प्रीमियम’, ‘सम इंश्योर्ड’ और ‘NCB’ जैसे भारी-भरकम शब्द आते हैं। अक्सर लोग इन्हें बिना समझे ही पॉलिसी ले लेते हैं। आइए, इन तीनों स्तंभों को एक सरल उदाहरण से समझते हैं।

1. प्रीमियम (Premium): पॉलिसी की ‘फीस’

प्रीमियम वह राशि है जो आप बीमा कंपनी को अपनी पॉलिसी चालू रखने के लिए हर साल (या हर महीने) चुकाते हैं। इसे आप एक ‘सब्सक्रिप्शन फीस’ की तरह समझ सकते हैं, जैसे आप नेटफ्लिक्स या जिम के लिए पैसे देते हैं।

  • ध्यान दें: यदि आप समय पर प्रीमियम नहीं भरते हैं, तो आपकी पॉलिसी लैप्स (बंद) हो जाती है और आपको बीमा का लाभ नहीं मिलता।

2. सम इंश्योर्ड (Sum Insured): इलाज का ‘बजट’

यह वह अधिकतम राशि है जो बीमा कंपनी एक साल के दौरान आपके इलाज के लिए खर्च करेगी। सरल शब्दों में, यह आपके इलाज की ‘लिमिट’ है।

  • उदाहरण: मान लीजिए आपने ₹5 लाख का ‘सम इंश्योर्ड’ लिया है। अगर आप अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो कंपनी ₹5 लाख तक का बिल भरेगी। अगर बिल ₹6 लाख आता है, तो ऊपर का ₹1 लाख आपको अपनी जेब से देना होगा।

3. नो-क्लेम बोनस (No-Claim Bonus – NCB): स्वस्थ रहने का ‘इनाम’

यह बीमा कंपनी की तरफ से आपको मिलने वाला एक बेहतरीन तोहफा है। अगर आप पूरी पॉलिसी अवधि (एक साल) के दौरान बीमार नहीं पड़ते और कोई क्लेम नहीं लेते, तो कंपनी अगले साल आपको इनाम देती है।

यह इनाम दो तरह से मिल सकता है:

  1. सम इंश्योर्ड में बढ़ोतरी: आपका प्रीमियम वही रहता है, लेकिन आपकी कवर राशि (जैसे ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹5.5 लाख) कर दी जाती है।
  2. प्रीमियम में छूट: अगले साल आपको कम प्रीमियम देना पड़ता है।

इन तीनों का आपसी संबंध: एक उदाहरण

कल्पना कीजिए कि राजेश ने एक हेल्थ पॉलिसी ली:

  • प्रीमियम: उन्होंने साल के ₹10,000 भरे।
  • सम इंश्योर्ड: उन्हें ₹5 लाख तक का कवर मिला।
  • नो-क्लेम बोनस: पहले साल राजेश बीमार नहीं पड़े। अगले साल कंपनी ने उनका कवर बढ़ाकर ₹5.5 लाख कर दिया, लेकिन राजेश को प्रीमियम अभी भी ₹10,000 ही देना पड़ा।
शब्दआसान मतलब
प्रीमियमवह पैसा जो आप कंपनी को देते हैं।
सम इंश्योर्डवह पैसा जो कंपनी आपके इलाज पर खर्च करेगी।
NCBक्लेम न लेने पर मिलने वाला ‘डिस्काउंट’ या ‘एक्स्ट्रा कवर’।

बीमा पॉलिसी लेते समय केवल सबसे कम प्रीमियम न देखें, बल्कि यह भी देखें कि उस प्रीमियम में आपको ‘सम इंश्योर्ड’ कितना मिल रहा है और कंपनी ‘नो-क्लेम बोनस’ के रूप में कितना इजाफा करती है।

Search

About

Lorem Ipsum has been the industrys standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown prmontserrat took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book.

Lorem Ipsum has been the industrys standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown prmontserrat took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries, but also the leap into electronic typesetting, remaining essentially unchanged.

Archive

Gallery