-
आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम क्यों रिजेक्ट हो सकता है? इन 5 गलतियों से बचें

बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के पीछे कई कानूनी और तकनीकी कारण होते हैं। यदि आप इन 5 आम गलतियों से बचते हैं, तो आपका क्लेम सेटल होने की संभावना 99% बढ़ जाती है। 1. पहले से मौजूद बीमारियों को छुपाना (Non-Disclosure of PED) यह क्लेम रिजेक्शन का सबसे बड़ा और आम कारण
-
अगर अस्पताल नेटवर्क में नहीं है, तो क्लेम के पैसे वापस कैसे पाएं?

जब आप किसी ऐसे अस्पताल में इलाज कराते हैं जो बीमा कंपनी की लिस्ट में नहीं है, तो आपको पहले सारा भुगतान खुद करना होता है। डिस्चार्ज होने के बाद, आप सभी बिल और मेडिकल रिपोर्ट्स कंपनी को जमा करते हैं और कंपनी जांच के बाद पैसा आपके बैंक खाते में भेज देती है। रीइंबर्समेंट
-
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले ये 10 बातें जरूर चेक करें

बीमा की दुनिया में छोटी-छोटी शर्तें (Hidden Terms) बड़े बदलाव ला सकती हैं। एक स्मार्ट खरीदार बनने के लिए इन 10 पैमानों पर अपनी पॉलिसी को परखें: 1. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio – CSR) यह दर्शाता है कि कंपनी ने पिछले साल प्राप्त हुए कुल क्लेम में से कितने प्रतिशत का भुगतान किया।
-
मैटरनिटी कवर: डिलीवरी के खर्चों से बचने के लिए सही पॉलिसी कैसे चुनें?

मैटरनिटी कवर एक ऐसा ‘एड-ऑन’ या ‘इनबिल्ट’ फीचर है जो गर्भावस्था (Pregnancy) से जुड़े सभी खर्चों को कवर करता है। लेकिन, यह सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस से थोड़ा अलग काम करता है। अगर आप अगले 2-3 सालों में माता-पिता बनने की सोच रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैटरनिटी इंश्योरेंस में क्या-क्या
-
25 की उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेने के 5 बड़े फायदे: कम प्रीमियम, ज्यादा फायदा

आज के दौर में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज, स्ट्रेस और पीसीओडी) उम्र देखकर नहीं आतीं। अगर आप 25 के हैं, तो आपके पास ‘अर्ली बर्ड’ होने का जबरदस्त फायदा है। आइए जानते हैं कैसे:1. बेहद कम प्रीमियम (Low Premium Costs) बीमा कंपनियां प्रीमियम का निर्धारण आपकी उम्र और स्वास्थ्य जोखिम के आधार पर
-
वेटिंग पीरियड क्या है? बीमा खरीदने के तुरंत बाद इलाज क्यों नहीं मिलता?

जब आप एक नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं, तो एक निश्चित समय सीमा होती है जिसके दौरान आप कुछ खास बीमारियों या स्थितियों के लिए क्लेम नहीं कर सकते। इस समय को ‘वेटिंग पीरियड’ (Waiting Period) या ‘प्रतीक्षा अवधि’ कहा जाता है। सरल शब्दों में, यह वह समय है जब आपकी पॉलिसी तो चालू
-
इंडिविजुअल या फैमिली फ्लोटर? आपके परिवार के लिए कौन सा प्लान बेस्ट है?

जब आप अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा कवच तैयार करते हैं, तो आपके पास दो मुख्य विकल्प होते हैं। सही चुनाव न केवल आपके प्रीमियम (खर्च) को प्रभावित करता है, बल्कि बीमारी के समय मिलने वाली मदद की मात्रा को भी तय करता है। 1. इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस (Individual Health Insurance) जैसा कि नाम
-
हेल्थ इंश्योरेंस क्या है? हेल्थ इंश्योरेंस क्यों जरूरी है?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती बीमारियों के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। मेडिकल खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अच्छे इलाज को काफी महंगा बना दिया है। ऐसी स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस एक वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। हेल्थ इंश्योरेंस एक
-
बायोहैकिंग और बीमा: क्या 2026 में प्रिवेंटिव जेनेटिक टेस्टिंग को कवर करेंगे बीमा प्लान?

वर्षों तक ‘बायोहैकिंग’ और ‘पारंपरिक स्वास्थ्य बीमा’ की दुनिया एक-दूसरे से कोसों दूर थी। बायोहैकर्स वे लोग थे जो खुद अपने डीएनए की जांच करते थे और लंबी उम्र (Longevity) की तलाश में खुद के बायोमार्कर ट्रैक करते थे। दूसरी ओर, बीमा कंपनियां पुरानी सोच पर टिकी थीं—वे केवल तभी जांच के पैसे देती थीं
Search
About
Lorem Ipsum has been the industrys standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown prmontserrat took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book.
Lorem Ipsum has been the industrys standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown prmontserrat took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries, but also the leap into electronic typesetting, remaining essentially unchanged.
Archive
Categories
Recent Posts
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में रोकथाम और प्रचार (Preventive & Promotive Healthcare) पर जोर: कारण और इलाज (Curative Care) से अंतर
- भारत में स्वास्थ्य बजट: वर्तमान स्थिति (2026 तक) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्यों से दूरी
- मोतियाबिंद और डायलिसिस: 24 घंटे से कम भर्ती होने वाले ‘डे-केयर’ इलाज का क्लेम कैसे लें?
- क्या बीमा में आयुर्वेद और होम्योपैथी का इलाज कवर होता है? जानें आयुष (AYUSH) कवर के नियम
- हार्ट अटैक और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए अलग से ‘क्रिटिकल इलनेस कवर’ क्यों जरूरी है?
Tags
Deductible in health insurance Health insurance porting benefits Insurance portability process Hindi PMJAY eligibility Super Top-up vs Top-up Hindi TataHealth TataHealthInsurance TataHealthPolicy TataPolicy पुरानी पॉलिसी कैसे बदलें राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 वेटिंग पीरियड ट्रांसफर सुपर टॉप-अप प्लान क्या है हेल्थ इंश्योरेंस कवर कैसे बढ़ाएं हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी
Gallery







