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मोतियाबिंद और डायलिसिस: 24 घंटे से कम भर्ती होने वाले ‘डे-केयर’ इलाज का क्लेम कैसे लें?

हेल्थ इंश्योरेंस का एक बुनियादी नियम है कि क्लेम पाने के लिए मरीज को कम से कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहना चाहिए। लेकिन, नई तकनीकों के आने के बाद बीमा कंपनियों ने इस नियम में ढील दी है। अब ऐसी प्रक्रियाएं जो 24 घंटे से कम समय में पूरी हो जाती हैं, ‘डे-केयर […]

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क्या बीमा में आयुर्वेद और होम्योपैथी का इलाज कवर होता है? जानें आयुष (AYUSH) कवर के नियम

भारत सरकार और IRDAI के निर्देशों के बाद, अब लगभग सभी बीमा कंपनियों ने अपने पोर्टफोलियो में AYUSH (Ayurveda, Yoga & Naturopathy, Unani, Siddha, Homeopathy) को शामिल कर लिया है। लेकिन, आयुष के तहत क्लेम पाने के नियम एलोपैथी से थोड़े अलग हो सकते हैं। आयुष (AYUSH) कवर में क्या-क्या शामिल है? आयुष क्लेम के

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हार्ट अटैक और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए अलग से ‘क्रिटिकल इलनेस कवर’ क्यों जरूरी है?

एक सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस केवल अस्पताल के बिलों का भुगतान करता है, लेकिन एक गंभीर बीमारी अस्पताल से बाहर भी कई तरह के खर्चे पैदा करती है—जैसे नौकरी का छूटना, लंबे समय तक चलने वाली दवाइयाँ और लाइफस्टाइल में बदलाव। यहीं पर क्रिटिकल इलनेस कवर काम आता है। क्रिटिकल इलनेस कवर क्या है? (What is

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डायबिटीज और बीपी के मरीजों के लिए बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस प्लान

पहले डायबिटीज और बीपी के मरीजों को बीमा मिलने में मुश्किल होती थी या 4 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब कई ऐसी योजनाएं हैं जो पॉलिसी लेने के पहले दिन से ही इन बीमारियों को कवर करती हैं। टॉप 5 हेल्थ इंश्योरेंस प्लान (2026 अपडेटेड) इंश्योरेंस कंपनी और प्लान मुख्य विशेषता

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पुरानी इंश्योरेंस कंपनी से परेशान हैं? अपनी पॉलिसी को ‘पोर्ट’ कैसे करें?

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी आपको यह आजादी देती है कि आप अपनी पसंद की कंपनी और बेहतर फीचर्स चुन सकें। IRDAI के नियमों के अनुसार, नई कंपनी को आपकी पुरानी पॉलिसी के ‘क्रेडिट’ (जैसे बीता हुआ वेटिंग पीरियड) को स्वीकार करना अनिवार्य है। पॉलिसी पोर्ट करने के मुख्य फायदे पोर्ट करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया (Step-by-Step Process)

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कम खर्च में कवरेज बढ़ाएं: क्या होता है ‘सुपर टॉप-अप’ प्लान?

मान लीजिए आपके पास ₹5 लाख की पॉलिसी है, लेकिन आप चाहते हैं कि किसी बड़ी बीमारी के लिए आपके पास ₹20 लाख का कवर हो। अगर आप ₹20 लाख की नई पॉलिसी लेंगे, तो प्रीमियम बहुत ज्यादा होगा। यहीं काम आता है ‘सुपर टॉप-अप’ प्लान। सुपर टॉप-अप कैसे काम करता है? सुपर टॉप-अप प्लान

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आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) क्या है? क्या आप भी मुफ्त इलाज के हकदार हैं?

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के समय अस्पताल के भारी खर्चों से बचाना है। योजना के मुख्य लाभ (Key Benefits) क्या आप इस योजना के पात्र हैं? (Eligibility Check) यह योजना मुख्य रूप से

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Section 80D: हेल्थ इंश्योरेंस से टैक्स कैसे बचाएं? जानें पूरी लिमिट

आयकर की धारा 80D आपको अपने, अपने परिवार और अपने माता-पिता के लिए चुकाए गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स कटौती (Deduction) का लाभ देती है। यह छूट धारा 80C (जैसे LIC, PPF) के ₹1.5 लाख की लिमिट के अलावा मिलती है। 80D के तहत टैक्स छूट की सीमा (Tax Limits) आपकी उम्र और आपके

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अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों को क्लेम कैसे करें?

क्या आप जानते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले किए गए ब्लड टेस्ट, एमआरआई (MRI), और डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस का पैसा भी आपको वापस मिल सकता है? आइए समझते हैं कि इसकी प्रक्रिया क्या है और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 1. प्री-हॉस्पिटलाइजेशन क्या है? (भर्ती होने से

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आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम क्यों रिजेक्ट हो सकता है? इन 5 गलतियों से बचें

बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के पीछे कई कानूनी और तकनीकी कारण होते हैं। यदि आप इन 5 आम गलतियों से बचते हैं, तो आपका क्लेम सेटल होने की संभावना 99% बढ़ जाती है। 1. पहले से मौजूद बीमारियों को छुपाना (Non-Disclosure of PED) यह क्लेम रिजेक्शन का सबसे बड़ा और आम कारण

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